तो रेलगाड़ी, हवाई जहाज, प्रचंड जलयान आदि मानवी पतितावस्थांतर्गत साधनों का उल्लेख ही नहीं करना चाहिए। उन्हें कुरसी, जूते, कोठी-बंगला, खेती-बाड़ी, खाद्यान्न, यंत्र, चरखा भी ज्ञात नहीं सादगीयुक्त जीवन के भक्त संप्रदायी के नाम से ही नहीं अपितू उसकी अभिलाषा से भी जावरा लोग अपरिचित हैं। उन आचार्यो को भी, जो सादगीयुक्त जीवन का डंका बजाते रहते हैं, लंगोटी पहनने का मोह होता ही है, जावरों को तो उतना भी मोह नहीं होता। बड़े निर्मोही हैं वे।
तो रेलगाड़ी, हवाई जहाज, प्रचंड जलयान आदि मानवी पतितावस्थांतर्गत साधनों का उल्लेख ही नहीं करना चाहिए। उन्हें कुरसी, जूते, कोठी-बंगला, खेती-बाड़ी, खाद्यान्न, यंत्र, चरखा भी ज्ञात नहीं सादगीयुक्त जीवन के भक्त संप्रदायी के नाम से ही नहीं अपितू उसकी अभिलाषा से भी जावरा लोग अपरिचित हैं। उन आचार्यो को भी, जो सादगीयुक्त जीवन का डंका बजाते रहते हैं, लंगोटी पहनने का मोह होता ही है, जावरों को तो उतना भी मोह नहीं होता। बड़े निर्मोही हैं वे।