परंतु क्या इस कारण वे असंतुष्ट हैं? कदापि नहीं। काश्तकारी नहीं, हल नहीं बैंकों में पैसा नहीं- न सही; परंतु जो किसी ऊबड़-खाबड़ गढ़ी-गुफा में पनाह अथवा मांस का टुकड़ा अस्थायी अग्रधिकारवश किसी जावरे के पास हो, उस पर दूसरे की निगाह न पड़े अथवा पड़ते ही जो सावधानी बरतनी अथवा चिंता करनी पड़ती है, व्यवस्था करनी पड़ती है, आवश्यकता पड़ने पर डटकर टक्कर देनी पड़ती है, यह सब उसके लिए उतना ही उत्कट और भयंकर होता है जितना किसी कैसर या जार
परंतु क्या इस कारण वे असंतुष्ट हैं? कदापि नहीं। काश्तकारी नहीं, हल नहीं बैंकों में पैसा नहीं- न सही; परंतु जो किसी ऊबड़-खाबड़ गढ़ी-गुफा में पनाह अथवा मांस का टुकड़ा अस्थायी अग्रधिकारवश किसी जावरे के पास हो, उस पर दूसरे की निगाह न पड़े अथवा पड़ते ही जो सावधानी बरतनी अथवा चिंता करनी पड़ती है, व्यवस्था करनी पड़ती है, आवश्यकता पड़ने पर डटकर टक्कर देनी पड़ती है, यह सब उसके लिए उतना ही उत्कट और भयंकर होता है जितना किसी कैसर या जार