तथापि जैसे-तैसे उनका तात्कालिक रूप से पीछा करके फिर से उन्हें गहरे जंगलों में खदेड़ देना-बस! इससे अधिक उनका पीछा करने का झंझट सरकारी अधिकारी कभी मोल नहीं लेते। हिंदुस्थान में एक राज्य जीतना जितना सुलभ है, उतना इन जंगलांे के वन्य तथा शूर लोगों पर काबू पाना सुलभ नहीं, जो तीरों की ीयंकर बौदार करते हैं। फिलहाल यह समस्या इतनी आवश्यक न होने के कारण आज तक ये लोग जंगल की अपरिचित निबिड़ता में रहकर, जिस तरह उनके पूर्वज जी रहे थे,
तथापि जैसे-तैसे उनका तात्कालिक रूप से पीछा करके फिर से उन्हें गहरे जंगलों में खदेड़ देना-बस! इससे अधिक उनका पीछा करने का झंझट सरकारी अधिकारी कभी मोल नहीं लेते। हिंदुस्थान में एक राज्य जीतना जितना सुलभ है, उतना इन जंगलांे के वन्य तथा शूर लोगों पर काबू पाना सुलभ नहीं, जो तीरों की ीयंकर बौदार करते हैं। फिलहाल यह समस्या इतनी आवश्यक न होने के कारण आज तक ये लोग जंगल की अपरिचित निबिड़ता में रहकर, जिस तरह उनके पूर्वज जी रहे थे,