जो शहरी दिखाई देता है, वे अपना प्राकृतिक शत्रु समझते हैं और जंल से निकलकर उसे अकेला देखकर उसके प्राण ले लेते हैं। कभी-कभी उसके मांस को वे कच्चा ही और कभी-कभी आग पर भूनकर खाते हैं। दिन निकलते ही हर कोई अपना-अपना तीर-कमान संभालता हुआ शिकार के लिए निकल पड़ता है। महिलाएं भी मच्छीमारी अथवा अन्य छोटे-मोटे शिकार के लिए निकल पड़ती है। उनकी टोलियां एक साथ एक छत के नीचे रहती हैं। आखेट में जो शिकार मिलता है उसमें सभी की साझेदारी। जंगली शहद,
जो शहरी दिखाई देता है, वे अपना प्राकृतिक शत्रु समझते हैं और जंल से निकलकर उसे अकेला देखकर उसके प्राण ले लेते हैं। कभी-कभी उसके मांस को वे कच्चा ही और कभी-कभी आग पर भूनकर खाते हैं। दिन निकलते ही हर कोई अपना-अपना तीर-कमान संभालता हुआ शिकार के लिए निकल पड़ता है। महिलाएं भी मच्छीमारी अथवा अन्य छोटे-मोटे शिकार के लिए निकल पड़ती है। उनकी टोलियां एक साथ एक छत के नीचे रहती हैं। आखेट में जो शिकार मिलता है उसमें सभी की साझेदारी। जंगली शहद,