मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

जो शहरी दिखाई देता है, वे अपना प्राकृतिक शत्रु समझते हैं और जंल से निकलकर उसे अकेला देखकर उसके प्राण ले लेते हैं। कभी-कभी उसके मांस को वे कच्चा ही और कभी-कभी आग पर भूनकर खाते हैं। दिन निकलते ही हर कोई अपना-अपना तीर-कमान संभालता हुआ शिकार के लिए निकल पड़ता है। महिलाएं भी मच्छीमारी अथवा अन्य छोटे-मोटे शिकार के लिए निकल पड़ती है। उनकी टोलियां एक साथ एक छत के नीचे रहती हैं। आखेट में जो शिकार मिलता है उसमें सभी की साझेदारी। जंगली शहद,


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जो शहरी दिखाई देता है, वे अपना प्राकृतिक शत्रु समझते हैं और जंल से निकलकर उसे अकेला देखकर उसके प्राण ले लेते हैं। कभी-कभी उसके मांस को वे कच्चा ही और कभी-कभी आग पर भूनकर खाते हैं। दिन निकलते ही हर कोई अपना-अपना तीर-कमान संभालता हुआ शिकार के लिए निकल पड़ता है। महिलाएं भी मच्छीमारी अथवा अन्य छोटे-मोटे शिकार के लिए निकल पड़ती है। उनकी टोलियां एक साथ एक छत के नीचे रहती हैं। आखेट में जो शिकार मिलता है उसमें सभी की साझेदारी। जंगली शहद,


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