मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

फल हर कोई अपना-अपना ग्रहण करता है। दिन भर भटककर रात में आग जलाकर उस पर वे शिकार लटकाते हैं। पहला शिकार भुनते ही उसे फाड़कर सभी जन एक साथ बैठकर खाते हैं। उसके पश्चात् कभी-कभी नर-नारी मिश्रित कोई नृत्य होने के उपरांत नर-नारियों के जोड़े अथवा सभी मिलकर उस आग के इर्दगिर्द वृत्ताकार नग्नावस्था में सो जाते हैं।


कुछ भगोड़े भारतीय बंदियों ने उन्हें खेती की परिकल्पना समझाने के लिए शाक-भाजी बनाकर दिखाई, तब उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ।


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फल हर कोई अपना-अपना ग्रहण करता है। दिन भर भटककर रात में आग जलाकर उस पर वे शिकार लटकाते हैं। पहला शिकार भुनते ही उसे फाड़कर सभी जन एक साथ बैठकर खाते हैं। उसके पश्चात् कभी-कभी नर-नारी मिश्रित कोई नृत्य होने के उपरांत नर-नारियों के जोड़े अथवा सभी मिलकर उस आग के इर्दगिर्द वृत्ताकार नग्नावस्था में सो जाते हैं।


कुछ भगोड़े भारतीय बंदियों ने उन्हें खेती की परिकल्पना समझाने के लिए शाक-भाजी बनाकर दिखाई, तब उन्हें बड़ा आश्चर्य हुआ।


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