जो उनके लिए ही बनवाई गई थी, रहते हुए और पुनः इस अभेद्य आरण्यक निबिड़ता में घुसकर अदृश्य हो जाना। वे जंगल से शहद लाकर उसे बेचते थे। इन सभी वस्तुओं को वहां से इकट्ठा करके सरकार उन्हें विदेश भेजती है। वहां के शंखों को ठीक तरह से घिसकर ऊपर से चंादी अथवा सुवर्ण की गढ़न के साथ भारी मोल लेकर उन्हें बेचा जाता। ये हिले हुए लोग अब एक छोटी सी लंगोटी पहनने लगे हैं। उनकी स्त्रियां एकाध पत्ता अथवा पर्णमाला कटि में लपेटती है। उपनिवेशीय
जो उनके लिए ही बनवाई गई थी, रहते हुए और पुनः इस अभेद्य आरण्यक निबिड़ता में घुसकर अदृश्य हो जाना। वे जंगल से शहद लाकर उसे बेचते थे। इन सभी वस्तुओं को वहां से इकट्ठा करके सरकार उन्हें विदेश भेजती है। वहां के शंखों को ठीक तरह से घिसकर ऊपर से चंादी अथवा सुवर्ण की गढ़न के साथ भारी मोल लेकर उन्हें बेचा जाता। ये हिले हुए लोग अब एक छोटी सी लंगोटी पहनने लगे हैं। उनकी स्त्रियां एकाध पत्ता अथवा पर्णमाला कटि में लपेटती है। उपनिवेशीय