इस कारण ये वन्य जावरा आधुनिक मानव की तरह उनके प्रति भी विशेष भावना रखते हैं। तथापि इतने निर्जन जंगलों में रहते हुए भी धीरे-धीरे उनमें ब्रांडी और देशी मदिरा का प्रवेश हो रहा है।
जावरों का व्यवसाय
अंगे्रजों से मिलकर रहनेवाले जावरों का प्रमुख व्यवसाय है सागर तट से अनेक सुदंर शंख, सीपियां तथा विविधाकृति चकमक पत्थर चुनकर अंगे्रजों की चैकी पर लाना-कुछ कांच के खिलौने, चीनी, तंबाकू लेकर उन वस्तुओं को बेचना- दो-चार निकटवर्ती इमारतों में,
इस कारण ये वन्य जावरा आधुनिक मानव की तरह उनके प्रति भी विशेष भावना रखते हैं। तथापि इतने निर्जन जंगलों में रहते हुए भी धीरे-धीरे उनमें ब्रांडी और देशी मदिरा का प्रवेश हो रहा है।
जावरों का व्यवसाय
अंगे्रजों से मिलकर रहनेवाले जावरों का प्रमुख व्यवसाय है सागर तट से अनेक सुदंर शंख, सीपियां तथा विविधाकृति चकमक पत्थर चुनकर अंगे्रजों की चैकी पर लाना-कुछ कांच के खिलौने, चीनी, तंबाकू लेकर उन वस्तुओं को बेचना- दो-चार निकटवर्ती इमारतों में,