तथापि आज भी उस भूमि का भरण-पोषण वैसे नहीं हुआ जैसे होना चाहिए। अभी तक पचास वर्षों में एक छोटे से हिस्से को ही कृषि योग्य बनाया गया है। जंगल की पैदावार भी दो बार हो सकती है। अतः आर्थिक दृष्टि से भी बंदियों की बसाहत बंद होने के बाद इस द्वीप की व्यवस्था कैसी रखी गई, उधर भूमि के गुट तथा बागान की बिक्री किस दर से होगी, इसे पहली बार हिंदुस्थान में विज्ञापित करके फिर उन्हें बेचा गया अथवा वह कुछ खास लोगों के हाथों में जा रही है,
तथापि आज भी उस भूमि का भरण-पोषण वैसे नहीं हुआ जैसे होना चाहिए। अभी तक पचास वर्षों में एक छोटे से हिस्से को ही कृषि योग्य बनाया गया है। जंगल की पैदावार भी दो बार हो सकती है। अतः आर्थिक दृष्टि से भी बंदियों की बसाहत बंद होने के बाद इस द्वीप की व्यवस्था कैसी रखी गई, उधर भूमि के गुट तथा बागान की बिक्री किस दर से होगी, इसे पहली बार हिंदुस्थान में विज्ञापित करके फिर उन्हें बेचा गया अथवा वह कुछ खास लोगों के हाथों में जा रही है,