मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

है कि वहां जाने के नाम पर बंदी भी थर-थर कांपने लगते हैं। इनके अतिरिक्त जंगल कटाई के लिए जिन टोलियांे को भेजा जाता है, उनके दुर्भाग्य की तो कोई सीमा नहीं होती।

अंदमान¹ में पहले-पहल जिन-जिन बंदियों की टोलियां भेजी गई वहां पहुंचने पर उन्हें पहले लगभग मुक्त छोड़ा जाता । आगे उनसे कुछ वर्षों तक सरकारी कैद में


काम करवाया जाता। जो स्वतत्रं रहते, वे धान की खेती करते। उनके वंशजों की जो बस्ती बढ़ती गई, उन्हें फेरी अर्थात् ‘फ्री’


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है कि वहां जाने के नाम पर बंदी भी थर-थर कांपने लगते हैं। इनके अतिरिक्त जंगल कटाई के लिए जिन टोलियांे को भेजा जाता है, उनके दुर्भाग्य की तो कोई सीमा नहीं होती।

अंदमान¹ में पहले-पहल जिन-जिन बंदियों की टोलियां भेजी गई वहां पहुंचने पर उन्हें पहले लगभग मुक्त छोड़ा जाता । आगे उनसे कुछ वर्षों तक सरकारी कैद में


काम करवाया जाता। जो स्वतत्रं रहते, वे धान की खेती करते। उनके वंशजों की जो बस्ती बढ़ती गई, उन्हें फेरी अर्थात् ‘फ्री’


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