ही है। यदि यह द्वीप हिंदुस्थान के अधिकार में न हो और यदि उसका परकोटा तथा युद्वजन्य शक्ति दुर्बल हो तो पूरब की ओर से होनेवाला कोई भी समुद्री हमला कलकत्ता तक जा पहुंचेगा, परंतु यदि अंदमान का द्वीपपुंज हिंदुस्थान की सत्ता के नीचे रहेगा तो उसे हवाई एवं सागरीय थाने की योग्यता प्राप्त हो जाएगी और प्राचीर दृढ़ की जाएगी, उधर भारतीय नौसेना का एक बलशाली बेड़ा सतत पहरा देगा और पूर्ववर्ती विदेशी शत्रु के किसी भी आक्रमण का पहला प्रतिकार
ही है। यदि यह द्वीप हिंदुस्थान के अधिकार में न हो और यदि उसका परकोटा तथा युद्वजन्य शक्ति दुर्बल हो तो पूरब की ओर से होनेवाला कोई भी समुद्री हमला कलकत्ता तक जा पहुंचेगा, परंतु यदि अंदमान का द्वीपपुंज हिंदुस्थान की सत्ता के नीचे रहेगा तो उसे हवाई एवं सागरीय थाने की योग्यता प्राप्त हो जाएगी और प्राचीर दृढ़ की जाएगी, उधर भारतीय नौसेना का एक बलशाली बेड़ा सतत पहरा देगा और पूर्ववर्ती विदेशी शत्रु के किसी भी आक्रमण का पहला प्रतिकार