मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

में खुसर-फुसर प्रारंभ हो गई-‘बारी साहब आ रहा है।’ बारी साहब से अधिक निष्ठुर अथवा कठोर व्यक्ति उन्हांेने कभी नहीं देखा था, अतः वे इस उत्कंठा से मेरी ओर ताकने लगे कि उसका नाम लेते ही मेरे मुख पर क्या प्रतिक्रिया होती है। परंतु मैं तो उस भीषण भव्य कारागृह के दो लौह दरवाजों के बीच के हिस्से को सुशोभित करने के लिए जो आभूषण धारण किए गए थे, उन्हें परखने में व्यस्त था। विभिन्न प्रकार से हथकड़ियां एक-दूसरी में गूॅंथकर उनके भद्दे,


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में खुसर-फुसर प्रारंभ हो गई-‘बारी साहब आ रहा है।’ बारी साहब से अधिक निष्ठुर अथवा कठोर व्यक्ति उन्हांेने कभी नहीं देखा था, अतः वे इस उत्कंठा से मेरी ओर ताकने लगे कि उसका नाम लेते ही मेरे मुख पर क्या प्रतिक्रिया होती है। परंतु मैं तो उस भीषण भव्य कारागृह के दो लौह दरवाजों के बीच के हिस्से को सुशोभित करने के लिए जो आभूषण धारण किए गए थे, उन्हें परखने में व्यस्त था। विभिन्न प्रकार से हथकड़ियां एक-दूसरी में गूॅंथकर उनके भद्दे,


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