वापस भारत लौटने के लिए इसी मार्ग से मैं इस जन्म में पुनः सागर की ओर आ भी सकूंगा?’
थोड़ी ही देर में चढ़ाई समाप्त हो गई और सिल्वर जेल का द्वार आ गया। लोहे की चुलों से दाढ़ कड़कड़ाने लगी। फिर उस कारागृह ने अपना जबड़ा खोला और मेरे भीतर घुसने के बाद वह जबड़ा जो बंद हुआ तो पुनः ग्यारह वर्ष बाद ही खुला।
बारी साहब आता है
छरवाजे के भीतर पैर रखते ही दो गोरे सार्जेटों ने मुझे दोनों से पकड़कर खड़ा किया। इतने में आस-पास के प्रहरियों
वापस भारत लौटने के लिए इसी मार्ग से मैं इस जन्म में पुनः सागर की ओर आ भी सकूंगा?’
थोड़ी ही देर में चढ़ाई समाप्त हो गई और सिल्वर जेल का द्वार आ गया। लोहे की चुलों से दाढ़ कड़कड़ाने लगी। फिर उस कारागृह ने अपना जबड़ा खोला और मेरे भीतर घुसने के बाद वह जबड़ा जो बंद हुआ तो पुनः ग्यारह वर्ष बाद ही खुला।
बारी साहब आता है
छरवाजे के भीतर पैर रखते ही दो गोरे सार्जेटों ने मुझे दोनों से पकड़कर खड़ा किया। इतने में आस-पास के प्रहरियों