निर्वासितों और दंडितों के आत्मवृत देखनेवालों ने जिन दृश्यों का वर्णन किया है, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, यह दृश्य उनसे अक्षरशः मेल खाता था। दोनों उद्दंड सार्जेटों ने मुझे पकड़कर उधर इस तरह खड़ा कर दिया कि उस दृश्य के भीषण जबड़ों से मेरा सारा मनोर्धर्य चकनाचूर हो जाए। वह भीषण्ता मेरी ओर आंखों से आंखें ििमला रहा था। दोनों का परिचय हो गया। मुझे एक अनोखी, अद्भुत संतुष्टि मिली। अच्छा, तो फिर मैंने जो पढ़ा वह स्वयं अनुभव
निर्वासितों और दंडितों के आत्मवृत देखनेवालों ने जिन दृश्यों का वर्णन किया है, जिसे सुनकर रोंगटे खड़े हो जाते हैं, यह दृश्य उनसे अक्षरशः मेल खाता था। दोनों उद्दंड सार्जेटों ने मुझे पकड़कर उधर इस तरह खड़ा कर दिया कि उस दृश्य के भीषण जबड़ों से मेरा सारा मनोर्धर्य चकनाचूर हो जाए। वह भीषण्ता मेरी ओर आंखों से आंखें ििमला रहा था। दोनों का परिचय हो गया। मुझे एक अनोखी, अद्भुत संतुष्टि मिली। अच्छा, तो फिर मैंने जो पढ़ा वह स्वयं अनुभव