किया और उधर इन दृश्यों के जबड़े में बिना टूटे निष्कंप-निर्भयता के साथ खड़ा हो गया। ब्रिस्टन की लंदन स्थित जेल में मैंने ‘दो मूर्ति’ तरह के उद्गार मेरे ह्नदय में उभरने लगे।
बारी बाबा का उपदेश
मनोविकारों के बवंडर से किंचित छुटकारा मिलते ही मैंने मुड़कर देखा तो एक मोटा-ताजा ह्नष्ट-पुष्ट गोरा अधिकारी हाथ में मोटा सा सोटा पकड़े मेरी ओर घूर रहा था। तो ये ही बारी साहब थे! उन्होंने हेतुपूर्वक अपने आगमन की बात मेरे कानों में डाली
किया और उधर इन दृश्यों के जबड़े में बिना टूटे निष्कंप-निर्भयता के साथ खड़ा हो गया। ब्रिस्टन की लंदन स्थित जेल में मैंने ‘दो मूर्ति’ तरह के उद्गार मेरे ह्नदय में उभरने लगे।
बारी बाबा का उपदेश
मनोविकारों के बवंडर से किंचित छुटकारा मिलते ही मैंने मुड़कर देखा तो एक मोटा-ताजा ह्नष्ट-पुष्ट गोरा अधिकारी हाथ में मोटा सा सोटा पकड़े मेरी ओर घूर रहा था। तो ये ही बारी साहब थे! उन्होंने हेतुपूर्वक अपने आगमन की बात मेरे कानों में डाली