मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

‘‘इसमें नहा लो।’’ चार-पांच दिन हो गए थे, मैं स्नान नहीं कर सका था। सागर यात्रा से शरीर अत्यधिक मैला हो गया था, घमोरियां निकल आई थी। अतः स्नान करने की अनुमति मिलते ही मुझे अति प्रसन्नता हुई। परंतु क्या भिगोऊं? जमादार ने काह, ‘‘लंगोटी।’’ अब काम करते तथा स्नान करते समय नियम से लंगोटी पहननी पड़ेगी। मन तनिक झिझका, पुनः कहा, ‘अरे पगले, रामदास भी तो लंगोटी ही पहना करते थे न! सभी जानते हैं, तुम्हारे इन कपड़ों के भीतर क्या है। फिर


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‘‘इसमें नहा लो।’’ चार-पांच दिन हो गए थे, मैं स्नान नहीं कर सका था। सागर यात्रा से शरीर अत्यधिक मैला हो गया था, घमोरियां निकल आई थी। अतः स्नान करने की अनुमति मिलते ही मुझे अति प्रसन्नता हुई। परंतु क्या भिगोऊं? जमादार ने काह, ‘‘लंगोटी।’’ अब काम करते तथा स्नान करते समय नियम से लंगोटी पहननी पड़ेगी। मन तनिक झिझका, पुनः कहा, ‘अरे पगले, रामदास भी तो लंगोटी ही पहना करते थे न! सभी जानते हैं, तुम्हारे इन कपड़ों के भीतर क्या है। फिर


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