मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

‘‘ऐसा मत करो। यह कालापानी है, भाई! पहले खड़े रहो। फिर मैं कहूंगा ‘पानी लो।’ फिर पानी लेना, वह भी एक कटोरा। फिर मैं कहूंगा, ‘अंग मलो। हाथ से शरीर रगड़ों।’ मैं कहूं, ‘और पानी लो’ कि पुनः दो कटोरे पानी लेना और वापस लौटना। तीन कटोरों-तीन थालियों-में स्नान करना है।’’

उस मुसलमान पठान जमादार की आज्ञा सुनते ही मैं चैंक पड़ा। मैं क्षेत्रवासी होने के कारण नासिक-न्न्यंबक के संकल्प अनुशासन से स्नान करने का आदी था। मन-ही-मन हंसते हुए मैंने कहा,


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‘‘ऐसा मत करो। यह कालापानी है, भाई! पहले खड़े रहो। फिर मैं कहूंगा ‘पानी लो।’ फिर पानी लेना, वह भी एक कटोरा। फिर मैं कहूंगा, ‘अंग मलो। हाथ से शरीर रगड़ों।’ मैं कहूं, ‘और पानी लो’ कि पुनः दो कटोरे पानी लेना और वापस लौटना। तीन कटोरों-तीन थालियों-में स्नान करना है।’’

उस मुसलमान पठान जमादार की आज्ञा सुनते ही मैं चैंक पड़ा। मैं क्षेत्रवासी होने के कारण नासिक-न्न्यंबक के संकल्प अनुशासन से स्नान करने का आदी था। मन-ही-मन हंसते हुए मैंने कहा,


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