‘यह भी इस तरह का एक संकल्प ही है। वह गोरे पानी का सकंल्प था, इसे बस कालेपानी का संकल्प कहा जाए।’ उस दढ़ियल दीक्षित ने यह संकल्प-कथन प्रारंभ किया। मैं स्नान करने लगा। इतने में आंखें लप से बंद हो गई। कुछ भी नहीं दिख रहा था और बहुत तेज जलन होने लगी क्या हुआ? संकल्प में कहीं कुछ भूल-चूक तो नहीं हुई? इतने में अंजलि भर गई और पानी मुंह में चला गया तो मुख ‘थू-थू’ करते हुए विद्रोह पर तुल गया। जीभ एकदम खारी बन गई। तब साहस जुटाकर जमादार से पूछज्ञ,
‘यह भी इस तरह का एक संकल्प ही है। वह गोरे पानी का सकंल्प था, इसे बस कालेपानी का संकल्प कहा जाए।’ उस दढ़ियल दीक्षित ने यह संकल्प-कथन प्रारंभ किया। मैं स्नान करने लगा। इतने में आंखें लप से बंद हो गई। कुछ भी नहीं दिख रहा था और बहुत तेज जलन होने लगी क्या हुआ? संकल्प में कहीं कुछ भूल-चूक तो नहीं हुई? इतने में अंजलि भर गई और पानी मुंह में चला गया तो मुख ‘थू-थू’ करते हुए विद्रोह पर तुल गया। जीभ एकदम खारी बन गई। तब साहस जुटाकर जमादार से पूछज्ञ,