मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

आग के भय से उसे कहीं भी लकड़ी का स्पर्श नहीं होने दिया था और उसमें एक जैसी, सप्रमाण रचना देखकर मन इतना हर्ष-विभोर हो गया जैसे मैं कोई सुगठित हवेली देख रहा हूं। यही सात नंबर चाली है, इसी के तृतीय तल पर मुझे रहना है। वाह! उत्तम हवा मिलेगी और भरपूर प्रकाश! ऐसा अपना घर होता तो मैं कितना श्रीमंत होता और कदाचित् चार-चार महीने इस विस्तृत भवन में और इस हरे-भरे आंगन में सुख से रह जाता। बस, इसक बंदीशाला


होने की भावना को त्याग


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आग के भय से उसे कहीं भी लकड़ी का स्पर्श नहीं होने दिया था और उसमें एक जैसी, सप्रमाण रचना देखकर मन इतना हर्ष-विभोर हो गया जैसे मैं कोई सुगठित हवेली देख रहा हूं। यही सात नंबर चाली है, इसी के तृतीय तल पर मुझे रहना है। वाह! उत्तम हवा मिलेगी और भरपूर प्रकाश! ऐसा अपना घर होता तो मैं कितना श्रीमंत होता और कदाचित् चार-चार महीने इस विस्तृत भवन में और इस हरे-भरे आंगन में सुख से रह जाता। बस, इसक बंदीशाला


होने की भावना को त्याग


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