अब ‘अंदमानिश बाथों’ का आनंद लेना चाहिए! राष्ट्रीय पापों का क्षालन उत्तम साबुन तथा सुगंधित तेल मल-मलकर गरम पानी के फववारों की सुखद फुहारों भरे स्नानों तथा संस्कृत संकल्पों द्वारा नहीं। ‘लो पानी’- इन कर्कश शब्दों के कठोर संकल्प द्वारा तीन कटोरे खारे पानी के स्नान से ही होगा।
कपड़े पहनकर आगे बढ़ा तो उस त्रितल (तीन तलीय) इमारत के दर्शन हुए। इसकी भीतें ईटों तथा पत्थरों से पक्की बनाई हुई थी, लंबी-लंबी एक ही ऊंचाई की सलाखों से उसमें विभिन्न खाने बनाए हुए थे,
अब ‘अंदमानिश बाथों’ का आनंद लेना चाहिए! राष्ट्रीय पापों का क्षालन उत्तम साबुन तथा सुगंधित तेल मल-मलकर गरम पानी के फववारों की सुखद फुहारों भरे स्नानों तथा संस्कृत संकल्पों द्वारा नहीं। ‘लो पानी’- इन कर्कश शब्दों के कठोर संकल्प द्वारा तीन कटोरे खारे पानी के स्नान से ही होगा।
कपड़े पहनकर आगे बढ़ा तो उस त्रितल (तीन तलीय) इमारत के दर्शन हुए। इसकी भीतें ईटों तथा पत्थरों से पक्की बनाई हुई थी, लंबी-लंबी एक ही ऊंचाई की सलाखों से उसमें विभिन्न खाने बनाए हुए थे,