सत्यासत्यता का निर्णय करने के लिए अंगे्रजों ने एक सरकारी कमीशन नियुक्त किया था। उसने यह निर्णय दिया कि अंगे्रज महिलाओं पर किए गए नैतिक अत्याचारों के वर्णन मिथ्या तथा अतिरंजित थे। वह अंगे्रजी छावनी के गोरे सोल्जरों के कुत्सित मस्तिष्क की उपज है।’’
कौन नहीं होता स्वार्थी
‘‘आपने नाना साहब और तात्या टोपे को स्वार्थी कहा?’’ हां‘‘’’, उस अतिथि ने कहा, ‘‘क्यांेकि नाना साहब राजा बनना चाहते थे और तात्या को महानता चाहिए थी।’’ मैंने कहा,
सत्यासत्यता का निर्णय करने के लिए अंगे्रजों ने एक सरकारी कमीशन नियुक्त किया था। उसने यह निर्णय दिया कि अंगे्रज महिलाओं पर किए गए नैतिक अत्याचारों के वर्णन मिथ्या तथा अतिरंजित थे। वह अंगे्रजी छावनी के गोरे सोल्जरों के कुत्सित मस्तिष्क की उपज है।’’
कौन नहीं होता स्वार्थी
‘‘आपने नाना साहब और तात्या टोपे को स्वार्थी कहा?’’ हां‘‘’’, उस अतिथि ने कहा, ‘‘क्यांेकि नाना साहब राजा बनना चाहते थे और तात्या को महानता चाहिए थी।’’ मैंने कहा,