हवलदार आादि लोग चले गए। पुनः मैं और मेरा दंड दोनों आमने सामने एक दूसरे से परिचित होने के लिए खड़े रहे।
यह परिचय पूरा होता गया। अब कोई संदेह शेश नहीं रहा। आशा नहीं थी,
तथापि यह संभावना थी - कदाचित् हेग के निर्णय से मुक्ति संभव हो- पर अब वह समाप्त हो गई। अब यह निश्चित है कि संपूर्ण जीवन इसी तरह की किसी कोठरी में सड़ता रहेगा। तो फिर? इसका भी सामना करना होगा, और क्या?
वही होगा जो प्रतिकूल है
मेरे इस कश्टमय हेतुपूर्वक
हवलदार आादि लोग चले गए। पुनः मैं और मेरा दंड दोनों आमने सामने एक दूसरे से परिचित होने के लिए खड़े रहे।
यह परिचय पूरा होता गया। अब कोई संदेह शेश नहीं रहा। आशा नहीं थी,
तथापि यह संभावना थी - कदाचित् हेग के निर्णय से मुक्ति संभव हो- पर अब वह समाप्त हो गई। अब यह निश्चित है कि संपूर्ण जीवन इसी तरह की किसी कोठरी में सड़ता रहेगा। तो फिर? इसका भी सामना करना होगा, और क्या?
वही होगा जो प्रतिकूल है
मेरे इस कश्टमय हेतुपूर्वक