कोठरी में थे। एक दिन खटमलों ने उनका लहू चूस चूसकर रात भर उनकी नींद हराम कर दी। मैंने सवेरे द्वार खोला, देखा तो तिलक खटमलों का शिकार करने में व्यस्त हैं। मैंने पूछा, ’क्यों महाराज, ठीक तो हैं न आप! ’वे श्शांति के साथ मुस्कुराते हुए बोले, ’ठीक तो हूं जमादार, केवल कल रात भर आंख नहीं लगी। तनिक भीतर तो आइए, देखिए आपके ये पालतू कीड़े।’ मैंने देखा, तो खटमलों की पंक्तियां भीत पर जा रही थी। ’परंतु तात्या साहब, यह जो राजनीतिक कार्य आपने हाथ में लिया है, वह सफल होगा क्या?’’
कोठरी में थे। एक दिन खटमलों ने उनका लहू चूस चूसकर रात भर उनकी नींद हराम कर दी। मैंने सवेरे द्वार खोला, देखा तो तिलक खटमलों का शिकार करने में व्यस्त हैं। मैंने पूछा, ’क्यों महाराज, ठीक तो हैं न आप! ’वे श्शांति के साथ मुस्कुराते हुए बोले, ’ठीक तो हूं जमादार, केवल कल रात भर आंख नहीं लगी। तनिक भीतर तो आइए, देखिए आपके ये पालतू कीड़े।’ मैंने देखा, तो खटमलों की पंक्तियां भीत पर जा रही थी। ’परंतु तात्या साहब, यह जो राजनीतिक कार्य आपने हाथ में लिया है, वह सफल होगा क्या?’’