जिससे मुझे इस बात का ज्ञान हो सके कि किससे कैसे व्यवहार करूं। उस समय कारागृह में बंगाल के माणिक टोले के लोग, इलाहाबाद के स्वराज पत्र के तीन-चार संपादक, बस इतने ही राजबंदी थे। जिन्हांेने मुझे यह चिट्ठी भिजवाई थी, वे मेरे पूर्व परिचित बंगाली मित्रों में से एक थे। उन्होंने इस तरह संदेश भेजा था कि राजबंदी होने के कारण ही सामान्यतः किसी पर विश्वास न करें। बंगाली लोगों में पकड़-धकड़ होने के उपररांत कुछ लोग सरकार में गुप्त वार्त्ताओं
जिससे मुझे इस बात का ज्ञान हो सके कि किससे कैसे व्यवहार करूं। उस समय कारागृह में बंगाल के माणिक टोले के लोग, इलाहाबाद के स्वराज पत्र के तीन-चार संपादक, बस इतने ही राजबंदी थे। जिन्हांेने मुझे यह चिट्ठी भिजवाई थी, वे मेरे पूर्व परिचित बंगाली मित्रों में से एक थे। उन्होंने इस तरह संदेश भेजा था कि राजबंदी होने के कारण ही सामान्यतः किसी पर विश्वास न करें। बंगाली लोगों में पकड़-धकड़ होने के उपररांत कुछ लोग सरकार में गुप्त वार्त्ताओं