मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

क्यांेकि सरकारी प्रतिज्ञा यह थी कि मेरे परस किसी भी हिंदू को फटकने नहीं देना है। आखिर मेरी कोठरी का दरवाजा खोलकर उस पेटी अफसर ने मेरे शरीर की तलाशी ली। चड्डी, बनियान की सिलाई भी टटोलकर देखी, परंतु चिट्ठी नहीं मिली। उस हिंदू वाॅर्डर की भी तलाशी ली गई। उसके पास भी कुछ नहीं मिला। अर्थात् यह प्रकरण इतने पर ही समाप्त हो गया।

सावधानी की सूचना

उन सबके चले जाने के बाद मैंने शरीर से चिट्ठी निकालकर पढ़ ली। उसमें कारागृह की स्थिति का वर्णन था,


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क्यांेकि सरकारी प्रतिज्ञा यह थी कि मेरे परस किसी भी हिंदू को फटकने नहीं देना है। आखिर मेरी कोठरी का दरवाजा खोलकर उस पेटी अफसर ने मेरे शरीर की तलाशी ली। चड्डी, बनियान की सिलाई भी टटोलकर देखी, परंतु चिट्ठी नहीं मिली। उस हिंदू वाॅर्डर की भी तलाशी ली गई। उसके पास भी कुछ नहीं मिला। अर्थात् यह प्रकरण इतने पर ही समाप्त हो गया।

सावधानी की सूचना

उन सबके चले जाने के बाद मैंने शरीर से चिट्ठी निकालकर पढ़ ली। उसमें कारागृह की स्थिति का वर्णन था,


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