बंगाल के षड्यंत्र के लोगों की फूट के संबंध में पढ़कर मुझे कोई विशेष आघात नहीं पहुंचा। क्यांेकि जब मैं जेल से बाहर था तभी मुझे ज्ञात हो गया था कि उनमें से प्रमुख व्यक्ति के पकड़े जाते ही कुछ लोगों के धीरज का बांध टूट गया और कलकत्ता के कारागार में ही परस्पर विश्वासघात करने की जैसे होड़ लग गई थी। कुछ लोगों का यद्यपि इस तरह अधःपतन हो चुका था, परंतु सभी विश्वासघाती नहीं थे, न ही सभी का धैर्य भंग हुआ था। इतना ही नहीं, उनमें से उन लोगों का,
बंगाल के षड्यंत्र के लोगों की फूट के संबंध में पढ़कर मुझे कोई विशेष आघात नहीं पहुंचा। क्यांेकि जब मैं जेल से बाहर था तभी मुझे ज्ञात हो गया था कि उनमें से प्रमुख व्यक्ति के पकड़े जाते ही कुछ लोगों के धीरज का बांध टूट गया और कलकत्ता के कारागार में ही परस्पर विश्वासघात करने की जैसे होड़ लग गई थी। कुछ लोगों का यद्यपि इस तरह अधःपतन हो चुका था, परंतु सभी विश्वासघाती नहीं थे, न ही सभी का धैर्य भंग हुआ था। इतना ही नहीं, उनमें से उन लोगों का,