तक पहुंच गए। उन पर दोषारोपण करने का अधिकार बस उन्हीं को है जो वैसे ही अपार शारीरिक काष्ट तथा मानसिक यंत्रणाएं सहते हुए भी विचलित नहीं हुए थे। संपूर्ण जीवन आरामकुर्सी पर लेटकर बितानेवाले किसी गोबरगणेश को यह अधिकार नहीं मिलता। मुझे इस तथ्य का भी ध्यान रहता कि क्रांातिकारियों के प्रमुखों के हाथों विश्वासघाती कृत्य केवल कुछ बंगालियों अथवा हिंदुस्थानियों के ही हाथों नहीं हुए, आयरलैंड, रूस, इटली आदि देशों में राज्यक्रांति तथा
तक पहुंच गए। उन पर दोषारोपण करने का अधिकार बस उन्हीं को है जो वैसे ही अपार शारीरिक काष्ट तथा मानसिक यंत्रणाएं सहते हुए भी विचलित नहीं हुए थे। संपूर्ण जीवन आरामकुर्सी पर लेटकर बितानेवाले किसी गोबरगणेश को यह अधिकार नहीं मिलता। मुझे इस तथ्य का भी ध्यान रहता कि क्रांातिकारियों के प्रमुखों के हाथों विश्वासघाती कृत्य केवल कुछ बंगालियों अथवा हिंदुस्थानियों के ही हाथों नहीं हुए, आयरलैंड, रूस, इटली आदि देशों में राज्यक्रांति तथा