ढोकर ले जाते नारियल पानी की-जो व्यर्थ जाता था- एक बंूद भी पीना कानूनी परिभाषा में जघन्य अपराध था और नित्य इन बंदियों को उसके लिए दंड मिलता। तथापि काम का आरंभ होते ही जिस-तिस का थोबड़ा नारियल के टुकड़ों से फूला हुआ और गरदन नीचे झुकी हुई होती तथा सहमी-सहमी आंखें कनखियों से यह देखती हुई लट्टू जैसी गोल-गोल मटकती रहती कि कोई अपने भरे हुए गालों की ओर तो नहीं देख रहा। उस बाजार की वह रौनक, वह भीड़-भाड़, वह कोलाहल, उस
103
अफसर
ढोकर ले जाते नारियल पानी की-जो व्यर्थ जाता था- एक बंूद भी पीना कानूनी परिभाषा में जघन्य अपराध था और नित्य इन बंदियों को उसके लिए दंड मिलता। तथापि काम का आरंभ होते ही जिस-तिस का थोबड़ा नारियल के टुकड़ों से फूला हुआ और गरदन नीचे झुकी हुई होती तथा सहमी-सहमी आंखें कनखियों से यह देखती हुई लट्टू जैसी गोल-गोल मटकती रहती कि कोई अपने भरे हुए गालों की ओर तो नहीं देख रहा। उस बाजार की वह रौनक, वह भीड़-भाड़, वह कोलाहल, उस
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