ही उस मद्रासी ने भी उसकी दाढ़ी पकड़कर खींचातानी शुरू की। किसी ने भी मुंह से चूं तक नहीं की, क्यांेकि दोनों की एक ही चाल थी- दही गोले की गुपचुप चोरी करना, अतः बस तेरी भी चुप, मेरी भी चुप। चोर-चोर मौसेरे भाई!
बस हो गया, माफ करो
आखिर यह देखते हुए कि अन्य बंदीवान उसकी ओर देखकर व्यंग्य से हंस रहे हैं, उसने नित्य नियम के अनुसार अपना सोटा निकालकर उस मद्रासी को जोर से मारा और उसकी चोटी को ऐसा झटका लगाया कि आधी उखाड़ डाली। ‘काफिर
ही उस मद्रासी ने भी उसकी दाढ़ी पकड़कर खींचातानी शुरू की। किसी ने भी मुंह से चूं तक नहीं की, क्यांेकि दोनों की एक ही चाल थी- दही गोले की गुपचुप चोरी करना, अतः बस तेरी भी चुप, मेरी भी चुप। चोर-चोर मौसेरे भाई!
बस हो गया, माफ करो
आखिर यह देखते हुए कि अन्य बंदीवान उसकी ओर देखकर व्यंग्य से हंस रहे हैं, उसने नित्य नियम के अनुसार अपना सोटा निकालकर उस मद्रासी को जोर से मारा और उसकी चोटी को ऐसा झटका लगाया कि आधी उखाड़ डाली। ‘काफिर