मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas



’हेग’ का निर्णय होने से पहले ही पच्चीस वर्ष कैसे निकालूंगा, इसका एक मनोमय चित्र बनाया था। उसमें जो माप निश्चित किया था अब वही दुगुना करना है। इन पच्चीस वर्शो में इस असहाय, निःसाधन तथा निरूत्साही विजन बंदीवास में भला ऐसा कौन सा कर्म किया जा सकता है, जिसके अर्पण द्वारा मातृभूमि का ऋण अल्प, स्वल्प मात्रा में ही क्यों न हो, हलका हो और मानवजाति की कुछ विशेश

सेवा हो सके। राले से लेकर को, जिसने ’पिलग्रिम्स प्रोग्रेस’ लिखा-लेखन-सामग्री


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’हेग’ का निर्णय होने से पहले ही पच्चीस वर्ष कैसे निकालूंगा, इसका एक मनोमय चित्र बनाया था। उसमें जो माप निश्चित किया था अब वही दुगुना करना है। इन पच्चीस वर्शो में इस असहाय, निःसाधन तथा निरूत्साही विजन बंदीवास में भला ऐसा कौन सा कर्म किया जा सकता है, जिसके अर्पण द्वारा मातृभूमि का ऋण अल्प, स्वल्प मात्रा में ही क्यों न हो, हलका हो और मानवजाति की कुछ विशेश

सेवा हो सके। राले से लेकर को, जिसने ’पिलग्रिम्स प्रोग्रेस’ लिखा-लेखन-सामग्री


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