मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

नियम के विरूद्व नीचे आंगन में आने ही क्यों दिया-इस सारे झमेलों से घबराकर पेटी अफसर और वह वाॅर्डर महाशय किसी ने भी साहब को वह बात बताना उचित नहीं समझा और तीन-चार दही गोले गटककर जो मुख शुद्वि की इच्छा वाॅर्डर के मन में उत्पन्न हुई थी, उसकी तुष्टि मद्रासी ने मुख पर मारे घूंसों से की मानकर अपने बिखरे हुए गलमुच्छे संवारते-संवारते और साफा बांधते-बांधते महाशय पुनः उस इमारत के तृतीय तल पर आकर मेरे ऊपर पहरा देने लगे। मैंने उन्हें सहज स्वर में पूछा,


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नियम के विरूद्व नीचे आंगन में आने ही क्यों दिया-इस सारे झमेलों से घबराकर पेटी अफसर और वह वाॅर्डर महाशय किसी ने भी साहब को वह बात बताना उचित नहीं समझा और तीन-चार दही गोले गटककर जो मुख शुद्वि की इच्छा वाॅर्डर के मन में उत्पन्न हुई थी, उसकी तुष्टि मद्रासी ने मुख पर मारे घूंसों से की मानकर अपने बिखरे हुए गलमुच्छे संवारते-संवारते और साफा बांधते-बांधते महाशय पुनः उस इमारत के तृतीय तल पर आकर मेरे ऊपर पहरा देने लगे। मैंने उन्हें सहज स्वर में पूछा,


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