स्वयं ही हमें ‘राजकैदी’ के नाम से संबोधित करने लगे। इस शब्द में अंतर्भूत स्वराज्यार्थ संघर्ष करने के जिस विचार के कारण बारी साहब उसका नाम भी नहीं लेने देते थे, उसी विचार का ठोस उल्लेख बंदिशों के चित्त पर अंकित हो, इसके लिए मैं सभी को यथासंभव यही उपदेश करता कि वे हमें उसी नाम से संबोधित करें। आखिर वही शब्द प्रचलित हो गया। बारी साहब को लेेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभ्ज्ञी ने दावे के साथ सौ-सौ बार स्पष्ट करते हुए भी कि ‘तुम पाॅलिटिकल प्रिजनर नहीं हो,
स्वयं ही हमें ‘राजकैदी’ के नाम से संबोधित करने लगे। इस शब्द में अंतर्भूत स्वराज्यार्थ संघर्ष करने के जिस विचार के कारण बारी साहब उसका नाम भी नहीं लेने देते थे, उसी विचार का ठोस उल्लेख बंदिशों के चित्त पर अंकित हो, इसके लिए मैं सभी को यथासंभव यही उपदेश करता कि वे हमें उसी नाम से संबोधित करें। आखिर वही शब्द प्रचलित हो गया। बारी साहब को लेेकर वरिष्ठ अधिकारियों तक सभ्ज्ञी ने दावे के साथ सौ-सौ बार स्पष्ट करते हुए भी कि ‘तुम पाॅलिटिकल प्रिजनर नहीं हो,