मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

परिश्रम करते हुए भी कम से कम रात्रि में अकेले पड़े रहने पर बत्ती न दी या कागज-पेंसिल का टुकड़ा पास न रखने दिया, तो भी एकाध काव्य की रचना संभव है। मन-ही-मन कविता रच, कंठस्थ कर अपने स्मृति-पत्र पर ही उसे लिखता गया तो इस पर तो कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता। वर्तमान की इस अत्यंत निर्दय साधनहीनता में भी यह कार्य करना तो संभव है ही। औरयदि इस तरह मैं एकाध काव्य रच सका तो इस बंदीवास से कभी मुक्त होने पर, और यदि मुक्ति नहीं भी मिली


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परिश्रम करते हुए भी कम से कम रात्रि में अकेले पड़े रहने पर बत्ती न दी या कागज-पेंसिल का टुकड़ा पास न रखने दिया, तो भी एकाध काव्य की रचना संभव है। मन-ही-मन कविता रच, कंठस्थ कर अपने स्मृति-पत्र पर ही उसे लिखता गया तो इस पर तो कोई प्रतिबंध नहीं लगा सकता। वर्तमान की इस अत्यंत निर्दय साधनहीनता में भी यह कार्य करना तो संभव है ही। औरयदि इस तरह मैं एकाध काव्य रच सका तो इस बंदीवास से कभी मुक्त होने पर, और यदि मुक्ति नहीं भी मिली


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