महाकाव्य
धुर बचपन से ही एक इच्छा थी कि मराठी में एक महाकाव्य2 लिखा जाए। क्या, किस तरह, इतना ही नहीं अपितुु मुझे इस बात का भी निश्चित ज्ञान नहीं था कि
महाकाव्य होता क्या है? पर लिखूंगा, यह निश्चिय था। उस छुटपन से आज तक यह इच्छा सालती रही थी। कर्मक्षेत्र के घमासान में यद्यपि यह मनीशा मन से ओझल हो चुकी थी तथापि कारागृह की एकांत कोठरी की इस श्शांत धूलि पर लेटते ही यह इच्छा पुनः दृश्टिगोचर होने लगी। इस कोठरी में कठोर
महाकाव्य
धुर बचपन से ही एक इच्छा थी कि मराठी में एक महाकाव्य2 लिखा जाए। क्या, किस तरह, इतना ही नहीं अपितुु मुझे इस बात का भी निश्चित ज्ञान नहीं था कि
महाकाव्य होता क्या है? पर लिखूंगा, यह निश्चिय था। उस छुटपन से आज तक यह इच्छा सालती रही थी। कर्मक्षेत्र के घमासान में यद्यपि यह मनीशा मन से ओझल हो चुकी थी तथापि कारागृह की एकांत कोठरी की इस श्शांत धूलि पर लेटते ही यह इच्छा पुनः दृश्टिगोचर होने लगी। इस कोठरी में कठोर