मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

की ’सर’ के काॅटन श्शब्द के आधार पर सावरकर ने यह उत्कृश्ट व्यंग्य रचना की है- काॅटन माने कपास, सरकी माने बिनौला- अर्थात् काॅटन का बिनौला निकाल डालो। किसी ने कहा, उसकी पंेशन बंद करो। आखिर चाय की प्याली के इस तूफान के झोंके के साथ ही राश्ट्रीय सभा का सावरकर तथा उनके अनगामियों के पथ से किसी प्रकार का संबंध तो दूर, रत्ती भर सहानुभूति भी नहीं है। ’केसरी’ के जिस टुकड़े में मैंने यह वृत्तांत पढ़ा था, उसी में केसरीवालों ने एक-दो


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की ’सर’ के काॅटन श्शब्द के आधार पर सावरकर ने यह उत्कृश्ट व्यंग्य रचना की है- काॅटन माने कपास, सरकी माने बिनौला- अर्थात् काॅटन का बिनौला निकाल डालो। किसी ने कहा, उसकी पंेशन बंद करो। आखिर चाय की प्याली के इस तूफान के झोंके के साथ ही राश्ट्रीय सभा का सावरकर तथा उनके अनगामियों के पथ से किसी प्रकार का संबंध तो दूर, रत्ती भर सहानुभूति भी नहीं है। ’केसरी’ के जिस टुकड़े में मैंने यह वृत्तांत पढ़ा था, उसी में केसरीवालों ने एक-दो


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