टिप्पणीं लिखकर सर हेनरी साहब का बचाव करने का प्रयास किया था। ’केसरी’ के लेख में मेरा नामनिर्देश एकवचनी संबोधन से किया हुआ देखकर मुझे मन-ही-मन आश्चर्य हुआ। ’सर साहब, यह सावरकर कौन? काला या गोरा, यह भी नहीं जानते।’ ऐसा वाक्य सर हेनरी काॅटन के समर्थन में लिखा था। ’केसरी’ सरीखे पत्र को भी उस परिस्थिति में यह लिखना पड़ा। परंतु उस समय अपना निरपराधत्व तथा शिश्टतव प्रस्थापित करने के लिए किसी भी राजनीतिक संस्था अथवा व्यक्ति के
टिप्पणीं लिखकर सर हेनरी साहब का बचाव करने का प्रयास किया था। ’केसरी’ के लेख में मेरा नामनिर्देश एकवचनी संबोधन से किया हुआ देखकर मुझे मन-ही-मन आश्चर्य हुआ। ’सर साहब, यह सावरकर कौन? काला या गोरा, यह भी नहीं जानते।’ ऐसा वाक्य सर हेनरी काॅटन के समर्थन में लिखा था। ’केसरी’ सरीखे पत्र को भी उस परिस्थिति में यह लिखना पड़ा। परंतु उस समय अपना निरपराधत्व तथा शिश्टतव प्रस्थापित करने के लिए किसी भी राजनीतिक संस्था अथवा व्यक्ति के