को आधा-अधुरा ही छोड़कर इस भेंट को समाप्त किया। परंतु जाते-जाते साले साहब ने जल्दी-जल्दी कहा, ’’अच्छा, परंतुु एक नियम का अवश्य पालन करें। प्रतिदिन प्रातःकाल ’कृश्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने! प्र्रणतक्लेशनाशाय गोविंदाय नमोस्तु ते।।’-इस मंत्र का जाप नियमपूर्वक अवश्य करें।’’ उनकी ओर प्रशंसापूर्ण दृश्टि से देखकर मैंने उत्तर दिया, ’’अवश्यं’’
वे वापस लौट गए। मैंने पीछे मुड़कर भी नहीं देखा। उन लोगों को, जो वापस लौट रहे थे, यह
को आधा-अधुरा ही छोड़कर इस भेंट को समाप्त किया। परंतु जाते-जाते साले साहब ने जल्दी-जल्दी कहा, ’’अच्छा, परंतुु एक नियम का अवश्य पालन करें। प्रतिदिन प्रातःकाल ’कृश्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने! प्र्रणतक्लेशनाशाय गोविंदाय नमोस्तु ते।।’-इस मंत्र का जाप नियमपूर्वक अवश्य करें।’’ उनकी ओर प्रशंसापूर्ण दृश्टि से देखकर मैंने उत्तर दिया, ’’अवश्यं’’
वे वापस लौट गए। मैंने पीछे मुड़कर भी नहीं देखा। उन लोगों को, जो वापस लौट रहे थे, यह