मेरा आजीवन कारावास - Mera Aajivan Karavas

के पुनर्जन्म के सिद्वांत को स्वीकार कर लिया है और ईसाई धर्म के पुनरूत्ािान का सिद्वांत छोड़ दिया है।’’

यह क्या? आज इतना शीध्र भोजन? कारागृह में भले ही जान चली जाए, परंतु पूर्व नियोजित कार्यøमानुसार ही चलना होता है। यहां पर सबके लिए इतना समयशील रहना होता है। भोजन के लिए, अन्न के लिए, मृत्यु आ जाए तो भी भोजन जल्दी नहीं आ सकता, यदि आवश्यक हो तो मृन्यु भोजन आने तक रूके। तो फिर भला आज यह असमय भोजन क्यों? अर्थात् कुछ-न-कुछ


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के पुनर्जन्म के सिद्वांत को स्वीकार कर लिया है और ईसाई धर्म के पुनरूत्ािान का सिद्वांत छोड़ दिया है।’’

यह क्या? आज इतना शीध्र भोजन? कारागृह में भले ही जान चली जाए, परंतु पूर्व नियोजित कार्यøमानुसार ही चलना होता है। यहां पर सबके लिए इतना समयशील रहना होता है। भोजन के लिए, अन्न के लिए, मृत्यु आ जाए तो भी भोजन जल्दी नहीं आ सकता, यदि आवश्यक हो तो मृन्यु भोजन आने तक रूके। तो फिर भला आज यह असमय भोजन क्यों? अर्थात् कुछ-न-कुछ


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