नया घटनेवाला है। मैंने पहरे पर खडे़ गोरे अधिकारी की ओर जिज्ञासा दृष्टि से देखा। उसने अपनी टोपी पीछे करने के बहाने अपने हाथ दूर तक पीछे ले जाकर देा बार हिलाए- अर्थात् हमें कहीं और पहुंचना है। भोजन हो गया। भित्तिा पर एक नुकीले कंकर से कुछ कविताएं घसीटकर लिखी थी- उन्हें जल्दी-जल्दी पढ़कर रगड़-रगड़कर साफ किया- जिससे किसी को उनका पता न चले। इतने में सिपाही ने ‘चलो’ कहते हुए द्वार खोला। गोरे साजेंट के अधीन हमें कारागार अधीक्षक को सौंपा गया,
नया घटनेवाला है। मैंने पहरे पर खडे़ गोरे अधिकारी की ओर जिज्ञासा दृष्टि से देखा। उसने अपनी टोपी पीछे करने के बहाने अपने हाथ दूर तक पीछे ले जाकर देा बार हिलाए- अर्थात् हमें कहीं और पहुंचना है। भोजन हो गया। भित्तिा पर एक नुकीले कंकर से कुछ कविताएं घसीटकर लिखी थी- उन्हें जल्दी-जल्दी पढ़कर रगड़-रगड़कर साफ किया- जिससे किसी को उनका पता न चले। इतने में सिपाही ने ‘चलो’ कहते हुए द्वार खोला। गोरे साजेंट के अधीन हमें कारागार अधीक्षक को सौंपा गया,