जैसे कोई निर्जीव वस्तु हों। मोटर-रेल, पुन्ः स्टेशन । यह पता चला- यह ठाणे है और हमें वही के कारागृह में जाना है।
प्रकरण -3
ठाणे कारागृह
कारागृह में जहां-तहां गड़बड़। पचास वर्ष का दंड का, कालेपानी का एक बैरिस्टर बंदी! अधिकारियों का कड़ा आदेश कि कोई मेरी ओर आंख उठाकर भी न देखे। सारे वाॅर्डर और कैदियों को बाहर निकालकर एक भाग पूरा खाली करके रखा था। परंत उस कठोर आदेश के बावजूद बंदीगृह की जिज्ञासा बदाते हनंी बनी । उस कोठरी पर,
जैसे कोई निर्जीव वस्तु हों। मोटर-रेल, पुन्ः स्टेशन । यह पता चला- यह ठाणे है और हमें वही के कारागृह में जाना है।
प्रकरण -3
ठाणे कारागृह
कारागृह में जहां-तहां गड़बड़। पचास वर्ष का दंड का, कालेपानी का एक बैरिस्टर बंदी! अधिकारियों का कड़ा आदेश कि कोई मेरी ओर आंख उठाकर भी न देखे। सारे वाॅर्डर और कैदियों को बाहर निकालकर एक भाग पूरा खाली करके रखा था। परंत उस कठोर आदेश के बावजूद बंदीगृह की जिज्ञासा बदाते हनंी बनी । उस कोठरी पर,