चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

इसलिए आपकी मेहमानदारी हमको लाजिम है। आज सब सामान दुरुस्त किया है। इसी लौंडी के साथ आइए और झोंपड़ी को पवित्र कीजिए। इसका अहसान जन्म भर न भूलूँगा।

– सिद्धनाथ योगी।’

कुमार ने खत तेजसिंह के हाथ में दे दिया, उन्होंने पढ़ कर कहा – ‘साधु हैं, योगी हैं, इसी से इस खत में कुछ हुकूमत भी झलकती है।’ देवीसिंह और ज्योतिषी जी ने भी खत को पढ़ा।

शाम हो चुकी थी, कुमार ने अभी उस खत का कुछ जवाब नहीं दिया था कि तेजसिंह ने उस औरत से कहा – ‘हम लोगों को महात्मा जी की खातिर मंजूर है,


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इसलिए आपकी मेहमानदारी हमको लाजिम है। आज सब सामान दुरुस्त किया है। इसी लौंडी के साथ आइए और झोंपड़ी को पवित्र कीजिए। इसका अहसान जन्म भर न भूलूँगा।

– सिद्धनाथ योगी।’

कुमार ने खत तेजसिंह के हाथ में दे दिया, उन्होंने पढ़ कर कहा – ‘साधु हैं, योगी हैं, इसी से इस खत में कुछ हुकूमत भी झलकती है।’ देवीसिंह और ज्योतिषी जी ने भी खत को पढ़ा।

शाम हो चुकी थी, कुमार ने अभी उस खत का कुछ जवाब नहीं दिया था कि तेजसिंह ने उस औरत से कहा – ‘हम लोगों को महात्मा जी की खातिर मंजूर है,


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