मगर अभी तुम्हारे साथ नहीं जा सकते, घड़ी भर के बाद चलेंगे, क्योंकि संध्या करने का समय हो चुका है।’
औरत – ‘तब तक मैं ठहरती हूँ, आप लोग संध्या कर लीजिए, अगर हुक्म हो तो संध्या के समय के लिए जल और आसन ले आऊँ?’
देवीसिंह – ‘नहीं कोई जरूरत नहीं।’
औरत – ‘तो फिर यहाँ संध्या कैसे कीजिएगा? इस बाग में कोई नहर नहीं, बावड़ी नहीं।’
तेजसिंह – ‘उस दूसरे बाग में बावड़ी है।’
औरत – ‘इतनी तकलीफ करने की क्या जरूरत है, मैं अभी सब सामान लिए आती हूँ,
मगर अभी तुम्हारे साथ नहीं जा सकते, घड़ी भर के बाद चलेंगे, क्योंकि संध्या करने का समय हो चुका है।’
औरत – ‘तब तक मैं ठहरती हूँ, आप लोग संध्या कर लीजिए, अगर हुक्म हो तो संध्या के समय के लिए जल और आसन ले आऊँ?’
देवीसिंह – ‘नहीं कोई जरूरत नहीं।’
औरत – ‘तो फिर यहाँ संध्या कैसे कीजिएगा? इस बाग में कोई नहर नहीं, बावड़ी नहीं।’
तेजसिंह – ‘उस दूसरे बाग में बावड़ी है।’
औरत – ‘इतनी तकलीफ करने की क्या जरूरत है, मैं अभी सब सामान लिए आती हूँ,