चन्द्रकान्ता - Chandrakanta

औरतों ने उन पत्थरो पर सामान दुरुस्त कर दिया, इसके बाद तेजसिंह ने उन लोगों से कहा – ‘अब थोड़ी देर के वास्ते तुम लोग अपने बाग में चली जाओ क्योंकि औरतों के सामने हम लोग संध्या नहीं करते।’

‘आप ही लोगों की खिदमत करते जनम बीत गया, ऐसी बातें क्यों करते हैं। सीधी तरह से क्यों नहीं कहते कि हट जाओ। लो मैं जाती हूँ।’ कहती हुई वह औरत लौंडियों को साथ ले चली गई। उसकी बात पर ये लोग हँस पड़े और बोले – ‘जरूर ऐयारों के संग रहने वाली है।’


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औरतों ने उन पत्थरो पर सामान दुरुस्त कर दिया, इसके बाद तेजसिंह ने उन लोगों से कहा – ‘अब थोड़ी देर के वास्ते तुम लोग अपने बाग में चली जाओ क्योंकि औरतों के सामने हम लोग संध्या नहीं करते।’

‘आप ही लोगों की खिदमत करते जनम बीत गया, ऐसी बातें क्यों करते हैं। सीधी तरह से क्यों नहीं कहते कि हट जाओ। लो मैं जाती हूँ।’ कहती हुई वह औरत लौंडियों को साथ ले चली गई। उसकी बात पर ये लोग हँस पड़े और बोले – ‘जरूर ऐयारों के संग रहने वाली है।’


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