आज सब भेद मालूम किए बिना योगी का पिंड न छोङूँगा। हाल मालूम हो जाएगा कि वनकन्या कौन है, तिलिस्मी किताब उसने क्यो कर पाई थी, हमारे साथ उसने इतनी भलाई क्यों की और चंद्रकांता कहाँ चली गई?’
दीवानखाने में पहुँचे। आज यहाँ तस्वीर का दरबार न था बल्कि उन्हीं योगी जी का दरबार था, जिन्होंने पहाड़ी से कूदते हुए कुमार को बचाया था। लंबा-चौड़ा फर्श बिछा हुआ था और उसके ऊपर एक मृगछाला बिछाए योगी जी बैठे हुए थे, बाईं तरफ कुछ पीछे हट कर
आज सब भेद मालूम किए बिना योगी का पिंड न छोङूँगा। हाल मालूम हो जाएगा कि वनकन्या कौन है, तिलिस्मी किताब उसने क्यो कर पाई थी, हमारे साथ उसने इतनी भलाई क्यों की और चंद्रकांता कहाँ चली गई?’
दीवानखाने में पहुँचे। आज यहाँ तस्वीर का दरबार न था बल्कि उन्हीं योगी जी का दरबार था, जिन्होंने पहाड़ी से कूदते हुए कुमार को बचाया था। लंबा-चौड़ा फर्श बिछा हुआ था और उसके ऊपर एक मृगछाला बिछाए योगी जी बैठे हुए थे, बाईं तरफ कुछ पीछे हट कर