का इस तरह चला जाना बहुत बुरा मालूम हुआ ! आंखों में आंसू पर चपला से बोली, ‘‘यह क्या तमाशा हो गया, कुछ समझ में नहीं आता। उस पिशाच को देखकर मैं कैसी डरी, मेरे कलेजे पर हाथ रखकर देखो, अभी तक धड़धड़ा रहा है ! तुमने क्या खयाल किया ?’’
चपला ने कहा, ‘‘कुछ ठीक समझ में नहीं आता, हाँ, इतना जरूर है कि इस समय वीरेन्द्रसिंह के यहाँ आने की खबर महाराज को हो गई है, वे जरूर आते होंगे।’’ चम्पा बोली, ‘‘ न मालूम मुए को मुझसे क्या दुश्मनी थी ?’’
का इस तरह चला जाना बहुत बुरा मालूम हुआ ! आंखों में आंसू पर चपला से बोली, ‘‘यह क्या तमाशा हो गया, कुछ समझ में नहीं आता। उस पिशाच को देखकर मैं कैसी डरी, मेरे कलेजे पर हाथ रखकर देखो, अभी तक धड़धड़ा रहा है ! तुमने क्या खयाल किया ?’’
चपला ने कहा, ‘‘कुछ ठीक समझ में नहीं आता, हाँ, इतना जरूर है कि इस समय वीरेन्द्रसिंह के यहाँ आने की खबर महाराज को हो गई है, वे जरूर आते होंगे।’’ चम्पा बोली, ‘‘ न मालूम मुए को मुझसे क्या दुश्मनी थी ?’’