चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



रात पहर-भर से ज्यादा जा चुकी थी, चंद्रमा अपनी पूर्ण किरणों से उदय हो रहे थे। ठंडी हवा चल रही थी जिसमें सुगंधित फूलों की मीठी महक उड़ रही थी।

योगी ने मुस्करा कर कुमार से कहा – ‘अब जो कुछ पूछना हो पूछिए, मैं सब बातों का जवाब दूँगा और जो कुछ काम आपका अभी तक अटका है उसको भी कर दूँगा।’

कुँवर वीरेंद्रसिंह के जी में बहुत-सी ताज्जुब की बातें भरी हुई थीं, हैरान थे कि पहले क्या पूछूँ। आखिर खूब सँभल कर बैठे और योगी से पूछने लगे।


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रात पहर-भर से ज्यादा जा चुकी थी, चंद्रमा अपनी पूर्ण किरणों से उदय हो रहे थे। ठंडी हवा चल रही थी जिसमें सुगंधित फूलों की मीठी महक उड़ रही थी।

योगी ने मुस्करा कर कुमार से कहा – ‘अब जो कुछ पूछना हो पूछिए, मैं सब बातों का जवाब दूँगा और जो कुछ काम आपका अभी तक अटका है उसको भी कर दूँगा।’

कुँवर वीरेंद्रसिंह के जी में बहुत-सी ताज्जुब की बातें भरी हुई थीं, हैरान थे कि पहले क्या पूछूँ। आखिर खूब सँभल कर बैठे और योगी से पूछने लगे।


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