चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : दसवां बयान)
जो कुछ दिन बाकी था, दीवान हरदयालसिंह ने जासूसों को इकट्ठा करने और समझाने-बुझाने में बिताया। शाम को सब जासूसों को साथ ले हुक्म के मुताबिक महाराज जयसिंह के पास बाग में हाजिर हुए।
खुद महाराज जयसिंह ने जासूसों से पूछा – ‘तुम लोग जालिम खाँ का पता क्यो नहीं लगा सकते?’
इसके जवाब में उन्होंने अर्ज किया – ‘महाराज, हम लोगों से जहाँ तक बनता है कोशिश करते हैं, उम्मीद है कि पता लग जाएगा।’
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : दसवां बयान)
जो कुछ दिन बाकी था, दीवान हरदयालसिंह ने जासूसों को इकट्ठा करने और समझाने-बुझाने में बिताया। शाम को सब जासूसों को साथ ले हुक्म के मुताबिक महाराज जयसिंह के पास बाग में हाजिर हुए।
खुद महाराज जयसिंह ने जासूसों से पूछा – ‘तुम लोग जालिम खाँ का पता क्यो नहीं लगा सकते?’
इसके जवाब में उन्होंने अर्ज किया – ‘महाराज, हम लोगों से जहाँ तक बनता है कोशिश करते हैं, उम्मीद है कि पता लग जाएगा।’