फायदा है कि अपनी जान जोखिम में डाली जाए। वक्त टाल के क्यों नहीं चलते?’
आफत – ‘तुम तो गधे हो, कुछ खबर भी है कि हमने ऐसा क्यों किया?’
जालिम – ‘अब यह तो तुम जानो।’
आफत – ‘सुनो मैं बताता हूँ। मेरी नीयत यह है कि जहाँ तक हो सके जल्दी से उन लोगों को मार-पीट सब मामला खतम कर दूँ। उस वक्त वहाँ जितने आदमी मौजूद होंगे सभी को बस तुम मुर्दा ही समझ लो, बिना हाथ-पैर हिलाए सभी का काम तमाम करूँ तो सही।’
जालिम – ‘भला उस्ताद, यह कैसे हो सकता है?’
फायदा है कि अपनी जान जोखिम में डाली जाए। वक्त टाल के क्यों नहीं चलते?’
आफत – ‘तुम तो गधे हो, कुछ खबर भी है कि हमने ऐसा क्यों किया?’
जालिम – ‘अब यह तो तुम जानो।’
आफत – ‘सुनो मैं बताता हूँ। मेरी नीयत यह है कि जहाँ तक हो सके जल्दी से उन लोगों को मार-पीट सब मामला खतम कर दूँ। उस वक्त वहाँ जितने आदमी मौजूद होंगे सभी को बस तुम मुर्दा ही समझ लो, बिना हाथ-पैर हिलाए सभी का काम तमाम करूँ तो सही।’
जालिम – ‘भला उस्ताद, यह कैसे हो सकता है?’