चन्द्रकान्ता - Chandrakanta



जालिम – ‘यह शख्स बड़ा शैतान था।’

आफत – ‘लेकिन मुझसे बच के कहाँ जाता।’

जालिम – ‘मगर उस्ताद, तुम एक बात बड़ी बेढ़ब कहते हो कि कल बारह बजे रात को महल में चलना होगा।’

आफत – ‘बेढ़ब क्या है, देखो कैसा तमाशा होता है?’

जालिम – ‘मगर उस्ताद, तुम्हारे इश्तिहार दे देने से उस वक्त वहाँ बहुत से आदमी इकट्ठे होंगे, कहीं ऐसा न हो कि हम लोग गिरफ्तार हो जाएँ?’

आफत – ‘ऐसा कौन है जो हम लोगों को गिरफ्तार करे?’

जालिम – ‘तो इसमें क्या


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जालिम – ‘यह शख्स बड़ा शैतान था।’

आफत – ‘लेकिन मुझसे बच के कहाँ जाता।’

जालिम – ‘मगर उस्ताद, तुम एक बात बड़ी बेढ़ब कहते हो कि कल बारह बजे रात को महल में चलना होगा।’

आफत – ‘बेढ़ब क्या है, देखो कैसा तमाशा होता है?’

जालिम – ‘मगर उस्ताद, तुम्हारे इश्तिहार दे देने से उस वक्त वहाँ बहुत से आदमी इकट्ठे होंगे, कहीं ऐसा न हो कि हम लोग गिरफ्तार हो जाएँ?’

आफत – ‘ऐसा कौन है जो हम लोगों को गिरफ्तार करे?’

जालिम – ‘तो इसमें क्या


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