जालिम – ‘यह शख्स बड़ा शैतान था।’
आफत – ‘लेकिन मुझसे बच के कहाँ जाता।’
जालिम – ‘मगर उस्ताद, तुम एक बात बड़ी बेढ़ब कहते हो कि कल बारह बजे रात को महल में चलना होगा।’
आफत – ‘बेढ़ब क्या है, देखो कैसा तमाशा होता है?’
जालिम – ‘मगर उस्ताद, तुम्हारे इश्तिहार दे देने से उस वक्त वहाँ बहुत से आदमी इकट्ठे होंगे, कहीं ऐसा न हो कि हम लोग गिरफ्तार हो जाएँ?’
आफत – ‘ऐसा कौन है जो हम लोगों को गिरफ्तार करे?’
जालिम – ‘तो इसमें क्या
जालिम – ‘यह शख्स बड़ा शैतान था।’
आफत – ‘लेकिन मुझसे बच के कहाँ जाता।’
जालिम – ‘मगर उस्ताद, तुम एक बात बड़ी बेढ़ब कहते हो कि कल बारह बजे रात को महल में चलना होगा।’
आफत – ‘बेढ़ब क्या है, देखो कैसा तमाशा होता है?’
जालिम – ‘मगर उस्ताद, तुम्हारे इश्तिहार दे देने से उस वक्त वहाँ बहुत से आदमी इकट्ठे होंगे, कहीं ऐसा न हो कि हम लोग गिरफ्तार हो जाएँ?’
आफत – ‘ऐसा कौन है जो हम लोगों को गिरफ्तार करे?’
जालिम – ‘तो इसमें क्या