यह देख कर आफत खाँ ने अपने बटुए में से मरहम की एक डिबिया निकाली और सभी की आँखों में वह मरहम लगाया तथा हाथ में मल कर सुँघाया जिससे उन लोगों की तबीयत कुछ ठिकाने हुई और वे आफत खाँ की तारीफ करने लगे।
जालिम – ‘वाह उस्ताद, यह तो तुमने बहुत ही बढ़िया चीज बनाई है।’
आफत – ‘क्यों, अब तो महल में चलने का हौसला हुआ?’
जालिम – ‘शुक्र है उस पाक परवरदिगार का जिसने तुम्हें मिला दिया। जो काम हम साल भर में करते सो तुम एक रोज में कर सकते
यह देख कर आफत खाँ ने अपने बटुए में से मरहम की एक डिबिया निकाली और सभी की आँखों में वह मरहम लगाया तथा हाथ में मल कर सुँघाया जिससे उन लोगों की तबीयत कुछ ठिकाने हुई और वे आफत खाँ की तारीफ करने लगे।
जालिम – ‘वाह उस्ताद, यह तो तुमने बहुत ही बढ़िया चीज बनाई है।’
आफत – ‘क्यों, अब तो महल में चलने का हौसला हुआ?’
जालिम – ‘शुक्र है उस पाक परवरदिगार का जिसने तुम्हें मिला दिया। जो काम हम साल भर में करते सो तुम एक रोज में कर सकते