आफत – ‘बस चुप रहो, बिना खाए हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता।’
इसके बाद वे सब वहाँ से उठ कर एक तरफ को रवाना हो गए।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : बारहवां बयान)
वह दिन आ गया कि जब बारह बजे रात को बद्रीनाथ का सिर ले कर आफत खाँ महल में पहुँचे। आज शहर भर में खलबली मची हुई थी। शाम ही से महाराज जयसिंह खुद सब तरह का इंतजाम कर रहे थे। बड़े-बड़े बहादुर और फुर्तीले जवांमर्द महल के अंदर इकट्ठा किए जा रहे थे। सभी में जोश फैलता जाता था। महाराज
आफत – ‘बस चुप रहो, बिना खाए हमारा कुछ नहीं बिगड़ सकता।’
इसके बाद वे सब वहाँ से उठ कर एक तरफ को रवाना हो गए।
चन्द्रकान्ता ( चौथा भाग : बारहवां बयान)
वह दिन आ गया कि जब बारह बजे रात को बद्रीनाथ का सिर ले कर आफत खाँ महल में पहुँचे। आज शहर भर में खलबली मची हुई थी। शाम ही से महाराज जयसिंह खुद सब तरह का इंतजाम कर रहे थे। बड़े-बड़े बहादुर और फुर्तीले जवांमर्द महल के अंदर इकट्ठा किए जा रहे थे। सभी में जोश फैलता जाता था। महाराज